
हर रोज रहे त्यौहार यहाँ,
भारत की बात बताता हूँ,
हर दिन हर मास करूँ पूजा,
हिन्दू का धर्म निभाता हूँ।।
तर्ज – है प्रीत जहाँ की रीत सदा।
हरी ॐ हरी ॐ हरी ॐ,
भोले शंकर का सोमवार,
मंगल नवनिधि के दाता का,
गणपति का बुध गुरु का बृहस्पत,
है शुक्र संतोषी माता का,
शनिवार शनि रवि सूरज का,
हर वार की महिमा गाता हूँ,
हनुमान जयंती चेत सुदी,
और आखातीज बैसाख में है,
फिर ज्येष्ठ में आता गंग दशहरा,
रथ का पर्व आषाढ़ में है,
सावन में कावड़ लाता हूँ,
भोले शंकर को चढ़ाता हूँ,
जन्माष्टमी रक्षाबंधन,
भादो महीने में आते है,
दुर्गा पूजा नवरात सभी,
अश्विन में मिल के मनाते है,
आती दिवाली कार्तिक में,
घर द्वार मै खूब सजाता हूँ,
महाराणी सतीजी जन्मजयंती,
मृगशिर महीने में आये,
संक्रांत बसंत और शिवरात्रि,
है पौष माघ लेकर आये,
फागण में होली खेलने मैं,
दरबार श्याम के जाता हूँ,
जितनी महिमा दिन तिथियों की,
हर दिन हर मास ही प्यारे है,
एकम से अमावस पूर्णिमा तक,
‘लख्खा’ यहाँ अजब नज़ारे है,
हर दिन ही हर्ष लगे मेले,
सुनलो मैं सबको सुनाता हूँ,
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