
हे माँ मती दे और भले कुछ दे या न दे
आँखों में शुभ दर्शन पाऊ मैं तेरा रूप निहारु
धर्म जगा दे धर्म चरनी हे नंदा वा नंद सवरूपनी
धारनी धेर्य जगा दे
और भले कुछ दे न दे
माँ मती दे और भले कुछ दे या न दे
परमा रथ का अंत गिनोना हे आधारा पार लगाना
लोकिनी लाज बचा दे और भले कुछ दे न दे
जीवत मुक्ति का वर देना मुकश धमेंधा तू बन आना,
आदत अन्दन बरसादे और भले कुछ दे न दे
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