
आज मारे कानुड़ा रे काई होयो,
किनरी निजरा लागी रे,
अरे लून करावु इन मिरचा करावु,
लून करावु इन मिरचा करावु,
झटपट निजरा उतारू रे,
कानुडा ने ले मै तो बागा मे गई,
अरे माली जी री निजरा लागी रे,
माली जी री निजरा लागी रे,
अरे झाडाघर बुलवावु रे,
कानुडा ने ले मै तो जोशी रे गई,
इन ने जोशी जी री निजरा लागी रे,
जोशी जी री निजरा लागी रे,
इन झटपट निजरा उतारू रे,
कानुडा ने ले मै तो पनघट गई रे,
कानुडा ने ले मै तो पनघट गई,
पिनहारीया री निजरा लागी रे,
चौरासीया री निजरा लागी रे,
चन्द्र सखी री अरज विनती,
माने भवजल पार उतारो रे,
भवजल पार उतारो रे,
झाडाघर बुलवावु रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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