
ओ पवन पुत्र हनुमान राम के,
परम भक्त कहलाए,
तेरी महिमा सब जग गाए,
तर्ज – जहाँ डाल डाल पर सोने की।
है बालपने की बात तुम्ही ने,
रवि को मुख में दबाया,
हनुमान -२, हनुमान -२,
दुनिया में हाहाकार मचा,
जब घोर अँधेरा छाया,
ब्रम्हा ने वज्र प्रहार किया,
तबसे हनुमान कहाए,
वानर राजा सुग्रीव को,
पम्पापुर का राज्य दिलाया,
सीता जी की सुधि लाने का,
बीड़ा तुमने ही उठाया,
श्री राम को से मुद्रिका लेकर के,
लंका को चले हर्षाए,
करके समुन्दर पार विभीषण,
को बंधन से छुड़ाया,
अशोक वाटिका में जाकर,
माँ को सन्देश सुनाया,
सुनकर सन्देश सिया जी के,
नैनो में आंसू आए,
फल खाने की आज्ञा लेकर,
रावण का बाग़ उजाड़ा,
फल खाए पेड़ उखाड़ दिए,
और अक्षयकुमार को मारा,
तुम्हे मेघनाद ने छल से बांध,
रावण के सामने लाए,
रावण की आज्ञा से दानव ने,
पूछ में आग लगाई,
सियाराम चंद्र की जय कहकर,
सोने की लंका जलाई,
सीता जी से आज्ञा लेकर,
फिर रामादल में आए,
चरणों में शीश नवाकर के,
प्रभु को सन्देश सुनाया,
सुनकर के व्यथा सीता माँ की,
नैनो में नीर भर आया,
ओ राम दूत बलवान तुम्हारी,
महिमा वरणी ना जाए,
शक्ति लागि जब लक्ष्मण को,
तुमने ही प्राण बचाए,
अहिरावण के बंधन से,
राम लखन को छुड़ाकर लाए,
दोनों को छुड़ाकर लाए,
महावीर तुम्हारे चरणों में,
‘ताराचंद’ शीश नवाए,
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