
किसको कहूँ मैं अपना,
किसको कहूँ पराया,
हर एक शख्स ने है,
दिल मेरा दुखाया,
तेरे सिवा ऐ बाबा,
कोई समझ ना पाया,
तर्ज – आए हो मेरी ज़िन्दगी में।
तेरे तो मुझ पे बाबा,
एहसान ही बहुत है,
फिर भी कभी ना कहता,
एहसानमंद तू है,
हमदर्द बनके सबने,
है दर्द को बढ़ाया,
दिल को सुकून बाबा,
चरणों में तेरे आया,
मुझको नहीं जरूरत,
कि कोई मुझको समझे,
तू जानता है मुझको,
ये बात ही बहुत है,
मैं पापी हूँ या कपटी,
ये जानता तू ही है,
मैं हारी जब भी बाबा,
तूने गले लगाया,
स्वर – सिमरन जी कौर।
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