
कीड़ी ने कण हाथी ने मण,
सगलो हिसाब चुकावे है,
खाटु माहि बैठ्यो सांवरो,
सारो खेल रचावे है,
तर्ज – चाँद सितारे फूल और खुशबु।
जो जल में रेवे जीव जंतु,
वे जल में सब कुछ पावे है,
जो रवे हैं ई धरती पर,
वेई धरती सु पावे है,
ज्यारी जितनी चोंच होवे,
बितणो ही चुगो चुगावे है,
सरकारा तो है देखी घणी,
पर या सरकार अनोखी है,
इने नोट वोट ना कुरसी चाहे,
चाहे भावना चोखी है,
कठपुतलियां हाँ इन हाथा री,
यो ही नाच नचावे है,
बगुला रो भोजन मछली मांस,
और हंस तो मोती खावे है
और जैसो हो स्वभाव जियांको,
वैसी बोली पावे है,
रंग एक है काग कोयल रो,
वाणी भेद बतावे है,
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