
क्यूँ घबराऊँ मैं मेरा तो श्याम से नाता है
क्यूँ घबराऊँ मैं,
मेरा तो श्याम से नाता है,
मेरी ये जीवन गाड़ी,
श्याम चलाता है,
तर्ज – किस्मत वालों को मिलता है।
जब जब मुझको,
पड़ती है दरकार,
श्याम हमेशा रहता है तैयार,
श्याम ने मुझपर,
किया बहुत उपकार,
श्याम ही मेरे जीवन का आधार,
हरदम ये मुझपर अपना,
प्यार लुटाता है,
दुःख के बादल,
जब जब मंडराते,
श्याम नाम लेते ही,
छट जाते,
बाल भी बांका वो ना कर पाते,
कभी दुबारा नजर भी ना आते,
संकट आने से पहले,
श्याम आता है,
मेरे मन में आता,
जो भी ख्याल,
श्याम व्यवस्था करता है तत्काल,
हरपल मुझको ये ही रहा संभाल,
श्याम कृपा से मैं हूँ मालामाल,
जिसके लायक ही नहीं मैं,
वो मिल जाता है,
श्याम भरोसे मैं,
निश्चिन्त हूँ,
क्युकी मैं तो श्याम पे आश्रित हूँ,
श्याम चरण में पूर्ण समर्पित हूँ,
इसीलिए मैं सदा सुरक्षित हूँ,
जी भर के ‘बिन्नू’ को ये,
लाढ़ लढ़ाता है,
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