
गाजण माँ मापर महर करे,
दोहा – माँ धर्मधारी मे बिराजीया,
परिहारा री कुल री माँ,
दर्शन आवे यात्री,
माँ थारे बालक ने नर नार।
ए परिहारा री कुलदेवी माँ,
ए धर्मधारी मे परिहारा री,
कुलदेवी बिराजे ए,
आयोडा भगता रा कारज सारे माँ,
महर करे म्हारी माता लहर करे,
आयोडा भगता पर कारज सारे,
ओ गाजण माँ मापर महर करे।।
अरे गाँव धर्मधारी आसन थारो कहिजे,
गाँव धर्मधारी आसन थारो कहिजे,
परिहारा री कुलदेवी माँ बैठी म्हारी माँ,
मापर महर करे महर करे लीला लहर करे,
गाजण माँ मापर मेहर करे।।
बालोतरा सु संग पैदल गाजण माँ रे आवे,
कोई नर नारी जयकारा करता,
रमता बोले म्हारी माँ,
ए ढोला रे धमीडे माता रमता रमता आवे,
ढोला रे धमीडे माता रमता रमता आवे,
ए कोई माताजी दर्शन म्हाने देवो म्हारी माँ,
ए आम्बानी परिवार माता थारा गुण गावे,
आम्बानी परिवार माता थारा गुण गावे,
परिहारा ए रमता रमता आवे म्हारी माँ,
नर ने नारी एतो गाजण माँ ने मनावे,
ए परिहारा परिवार गुण गावे म्हारी माँ,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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