
जख्मी दिल ये पुकारे सुनले हारे के सहारे
जख्मी दिल ये पुकारे,
सुनले हारे के सहारे।
दोहा – वार किये है अपनों ने,
सबने किया किनारा,
डगमग नैया भवर में डोले,
मैंने तुझे पुकारा,
ना जाने कब सुध लेगा मेरी,
कब आएगा तू लीले चढ़के,
माना अधम हूँ जन्मों जनम का,
लेले अब तो शरण में।
लीले वाले ओ लीले वाले,
हार रहा हूँ आके जिता दे,
तर्ज – जाने वाले ओ जाने वाले।
महके बगिया वो,
जिसका बाग़बान तू,
कांटे हटा के करता,
राहें आसान तू,
राहों से मेरी-२,
कांटे हटा दे,
बंजर धरती पे,
नीर बरसा दे,
बाबा जन्मो की प्यारी अँखियाँ,
दरश दिखा दे,
सांवरे ‘रंजीता’ को-२,
अपना बना ले,
देदे चरणों में अपने,
तू जगह दे,
दर्शन दे दे मुझको,
जीने का वजह दे,
सांवरे ‘विपिन’ को-२,
सेवक बना ले,
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