
माँ में संसार समाया ऋषि मुनियों ने बतलाया
प्रभु ने खुद से भी है पुछा माँ है साथन बताया
जगत सारा माँ की मन्नत है चरणों में जन्नत है
ममता के मंदिर की है माँ सब से प्यारी मूर्त
भगवान नजर आता है जब देखू माँ की सूरत
माँ के पावन चरणों में सचा वैकुंठ समाया
इस प्यार भरी ममता को स्वयम नारायण ने पाया
जो भरी धुप में करदे अपनी आँचल की छाया
गोद में भर के तन को मेरा हर दोष मिटाया
जो खुद धरती पर सोये मेरे हर अष्ट को धोये
चाहे जो कष्ट उठाये संतान न भूखी सोये
अपने बच्चे के आंसू आँचल में अपने पिरोती
शब्दों में व्यान न होगा ऐसा अनमोल ये मोती
नैनो में शीतल धारा जैसे चमकीला तारा
थ्थ्ला जुबा को देती शब्दों की अविरल धारा
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