
जबसे बाबा के दर पे हम जाने लगे
जबसे बाबा के दर पे,
हम जाने लगे।
दोहा – टूट गई थी उम्मीदे सब,
टूट गई थी आस,
हार के दुनिया से मैं आई,
बाबा तेरे पास,
एक तुझपे ही था,
सांवरे मुझको विश्वास,
तेरी रहमत से बची है,
मेरे तन में साँस।
हर खुशी मिल गई,
देखते देखते,
कल तलक एक राह,
दिखती ना थी,
मंज़िले मिल गई,
तर्ज – देखते देखते।
क्या बताऊँ मैं तुमको कहानी मेरी,
कितनी बेनूर थी ज़िंदगानी मेरी,
श्याम ने जबसे पकड़ा है दामन मेरा,
ज़िंदगी सज गई देखते देखते,
सांवरे के करम से उदासी मेरी,
खुशियों में ढल गई देखते देखते,
मुझसे नज़रे मिलाने से कतराते थे,
कल तलक फेरकर मुंह को जो जाते थे,
वो ही आकर गले से लगाने लगे,
बेरूख़ी टल गई देखते देखते,
श्याम की रहमतो का असर ये हुआ,
बात सब बन गई देखते देखते,
सांवरा जो करम मुझपे करता नही,
मेरा नामो निशा जग में मिलता नही,
श्याम ने ‘शर्मा’ पे ऐसा अहसा किया,
हर बला टल गई देखते देखते,
कल तलक हसरते दिल में जो थी दबी,
फिर से वो पल गयी देखते देखते,
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