
जाके हनुमान कहना स्वामी से,
माता सीता हनुमान जी से –
हर घडी उनको याद करती हूँ,
प्यासी मछली सी मैं तड़पती हूँ,
ना तो जीती हूँ ना मैं मरती हूँ,
जल्दी ले जाए अपनी सीता को,
इतनी फरियाद उनसे करती हूँ,
तर्ज – मेरी किस्मत में तू नहीं शायद।
जो तुम ना नाथ अपनी दासी को,
जल्दी लेने ना आप आओगे,
देर कर दी जो नाथ आने में,
मुझको जिन्दा ना आप पाओगे,
भूल जाए ना नाथ सीता को,
इतना मैं सोच करके डरती हूँ,
मेरी विनती है इतनी स्वामी से,
मेरी इतनी सी बस तमन्ना है,
उनके चरणों में मुझको जीना है,
उनके चरणों में मुझको मरना है,
रात दिन राह देखती हूँ मैं,
आपका इंतजार करती हूँ,
काश उस रोज अपने स्वामी की,
उस घडी बात मान जो लेती,
भेजती ना शिकार करने को,
उसका अंजाम जान जो लेती,
कर दे अपराध माफ़ सीता का,
हरी इतनी पुकार करती हूँ,
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