
जिद है कन्हैया बिगड़ी बना दो
जिद है कन्हैया,
बिगड़ी बना दो,
मार के ठोकर या फिर,
हस्ती मिटा दो,
तर्ज – सागर किनारे।
बरसे जो तू तो,
कुटिया टपकती,
ना बरसे तो,
खेती तरसती,
बरबस ही मेरी,
आंखे बरसती,
मांगू क्या तुझसे,
तुम ही बता दो,
रोता हूँ मैं तो,
हंसती है दुनिया,
सेवक पे तेरे ताने,
कसती है दुनिया,
हालत पे मेरे,
बरसती है दुनिया,
रोते हुए को,
फिर से हसा दो,
तेरे सिवा कोई,
हमारा नहीं है,
बिन तेरे अपना,
गुजारा नहीं है,
हाथों को दर दर,
पसारा नहीं है,
जाऊं कहाँ मैं,
होश संभाली जबसे,
तुझको निहारा,
सुख हो या दुःख हो,
तुझको पुकारा,
सेवक ये तेरा क्यों,
फिरे मारा मारा,
अपना वो जलवा,
हमें भी दिखा दो,
‘रोमी’ ये तुझसे,
अर्जी लगाए,
सपने ना टूटे जो,
तुमने दिखाए,
सर मेरा दर दर,
झुकने ना पाए,
सपनो के मेरे,
पंख लगा दो,
स्वर / रचना – रोमी जी।
प्रेषक – निलेश खंडेलवाल।
धाम नगांव रेलवे।
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