
झूम झूम के आईं झूम झूम के,
सिंघ बैठी आई मोरी मैया,
सांचे में से माँ को पुकारो,
दौड़ी दौड़ी आयें मोरी मैया,
न फूल पाती न भोजन थाली,
भाव की भूखी हैं मोरी मैया,
न चौंकी कोई न रेशम की आसन,
हिरदय में वो तो विराजे मोरी मैया,
राजेन्द्र दर्शन की आशा लगी है,
सो सिंघ पे बैठी आयें मोरी मैया,
गीतकार/गायक-राजेन्द्र प्रसाद सोनी
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