
डमरू बाजे डिमक डिम डिम,
जटा जुटन की मुकुट पर मौर फणधर का विराजै,
डमरू बाजे, डमरू बाजे,
डमरू बाजे, डमरू बाजे, डमरू बाजे।
भस्म भूषित गौर तन पर रुचिर नीलाम्बर मनोहर,
रुचिर नीलाम्बर मनोहर
विषभ की खाशिन शंकर मुंडो की माला सजाकर,
मुंडो की माला सजाकर
चले जब सब गण पुकारे नमो हर हर नमो हर हर,
नमो हर हर नमो हर हर
परम सूंदर रूप अद्भुत रीतिकोटिक कामलाजै,
चुरपानी त्र्यंभ शिवजी चले गौरा को व्याहने,
यु चले गौरा को व्याहने
नाचते है भूत गण सब देव किन्नर लगे गाने,
देव किन्नर लगे गाने
श्रीपति इन्द्रधि सुरनर लगे दर्शन लाभ पाने,
लगे दर्शन लाभ पाने
निरखि तू नर रूप शिव का नाचती अप्सरा साजे,
जगत के कल्याण कर्ता सकल दुःख संताप हर्ता,
सकल दुःख संताप हर्ता
युगल श्री शिव शिवा के श्री चरण का जो ध्यान धर्ता,
चरण का जो ध्यान धर्ता
वो सदा सर्वदा शिव की कृपा से आनंद कर्ता,
कृपा से आनंद कर्ता
सदा शिवगौरीश शंकर ह्रदय में सबके विराजै,
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