
तेरा दर जबसे पाया है मैंने,
आए कितने भी दुःख ना डरता हूँ,
मैं तेरा नाम लिया करता था,
मैं तेरा नाम लिया करता हूँ।
तर्ज – मेरी किस्मत में तू नहीं शायद।
सोचता हूँ की देखा क्या तुमने,
लगाया सेवा में मुझे अपनी,
मैं तो बड़ा पापी था प्रभु मुझको,
धूलि चरणों की दे दी है अपनी,
प्रेम शायद इसी को कहते है,
तेरी यादों में मस्त रहता हूँ,
करूँ कैसे मैं शुक्रिया तेरा,
तूने इतना दिया प्रभु मुझको,
पास मेरे नहीं है कुछ अपना,
करूँ अर्पण प्रभु मैं क्या तुमको,
निकले आंसू जो तेरी यादों में,
शुक्र उनसे मैं अदा करता हूँ,
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