
भव सु पार उतारो गुरासा,
बंधीयो जीव मारो अशुभ कर्म में,
माया रो बंधीयो जालो ए हा,
सोहन थाल भरीयो पृथ्वी मे,
ज्यारो पकडो लारो गुरासा,
भव सु पार उतारों ए हा,
कदेनी भूलू गुण थारो गुरासा,
घट में दया विचारो ए हा।।
गुण है एक अवगुण घणा भरीया,
करनी रे सामी क्यो भालो ए हा,
मुझ पर महर करो मेरे दाता,
बनकर हंस ऊबारो गुरासा,
इन्द्र आप मोर ज्यु मै हूँ,
बोलन रो हक है मारो ए हा,
मारी बोली पर नही बरसो तो,
नही लागे जोर हमारो गुरासा,
दुर्बल मै तो कहिजु राज रो,
चाहे मारो चाहे तारो ए हा,
कहे दुराराम सेन सतगुरु री,
दिल में दया विचारो गुरासा,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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