
तेरे हाथ की हम कठपुतली
जन्म मरण और वर्ण प्रभु है सब तेरे हाथ,
तेरे हाथ की हम कठपुतली,
है कुछ भी नहीं औकात,
कब किसी घडी में किस जगह पे तू दुनिया पे आएगा,
कौन पिता और माता होंगे किसका वंश बढ़ाये गा,
हर सांस का कच्चा चिठा रखते है दीना नाथ,
परिवर्तन है नियम यहाँ का जो आया सो जायेगा,
लेख लिखा किस्मत में जो भी कोई बदल न पायेगा,
शादी का योग अटल है निश्चित फेरो की रात,
समय का चक्र नहीं रुकता है,
हर दम चलता रहता है,
अच्छे बुरे करो का फल भी पल पल मिलता रहता है,
सृष्टि के रचयेता ने दी है ये हमे सौगात,
अपनी सारी शक्ति देदी भगवान में इंसान को,
कहे मोहित इंसान चनौती देने लगा भगवन को,
ये तीन चीज रखी है भगवन में अपने पास,
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