
दिन उगता ही लेऊँ साँवरा दिल स्यूं थारो नाम रे
कर दयो म्हारा सेठ साँवरा म्हारा अटक्या काम रे
म्हारा अटक्या काम रे म्हारा अटक्या काम रे
म्हारी रोजी रोटी साँवरा थारे भरोसे चाले रे
थारी मर्जी बिन तो जग में पत्तो भी ना हाले रे
थारे नाम की माला फेरूँ रोज़ सुबह स्यूँ शाम रे
तू म्हारो आधार साँवरा तने छोड़ कठे जावाला
थारी कृपा ना बरसी तो भूखा ही मर जावाला
थारी अर्जी करतो हारयो म्हारी आंगली थाम रे
थे म्हारा अन्नदाता म्हें छोटो सो थारो दास रे
छोटी सी झोपड़िया माहीं करके बैठ्यो आस रे
आनो हो आजा साँसे होने लागी जाम रे
थारे सिवा निर्धन रे आँगन और कोई ना आवेलो
दुनिया ने दुख दिया साँवरा याने तू ही मिटावेलो
रतन राव गुण गावे लिखयो मस्तराम पैग़ाम रे
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