
दो राजपुत्र दो तेजवंत दो शक्तिमान टकरावे
दो राजपुत्र दो तेजवंत,
दो शक्तिमान टकरावे,
तीरन से काटे तीरन को,
तीरन पे तीर चलावे,
हर हर महादेव,
क्या महाप्रतापी मेघनाथ,
जितने भी शस्त्र चलाता है,
उत्तर से आया लक्ष्मण सबके,
उत्तर देता जाता है,
कोई क्रांत नहीं दोनों में कोई,
नहीं पीछे पाँव हटाता है,
यह महासमर हर बार और भी,
गहरा होता जाता है,
बाणों से निकले अग्नि कभी,
बरसात कभी बरसावे,
एक युद्ध करे बाहुबल से,
एक शस्त्रो पर अभिमान करे,
एक राम चंद्र की जय बोले,
एक रावण का जयगान करे,
मुस्काये राम रण देख चकित,
सबको लक्ष्मण का बाण करे,
यह महा समर वो जीत गया,
जिसकी विजय भगवान करे,
दोनों अपने सन्मान हेतु,
प्राणो का दांव लगावे,
स्वर – सतीश डेहरा व साथी।
प्रेषक – कन्हैयालाल पाटीदार।
रामायण के अन्य भजनों के लिरिक्स भी देखें –
१. हम कथा सुनाते।
२. राम नाम आधार जिन्हे।
३. राम भक्त ले चला रे।
४. यही रात अंतिम यही।
५. राम कहानी सुनो रे।
६. ओ मैया तेने का ठानी।
७. मेरे लखन दुलारे बोल।
८. वन वन भटके राम।
९. श्री राम जी की सेना चली।
१०. सीताराम दरश रस बरसे।
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