
नटखट ललना झूल रहा पलना
नटखट ललना झूल रहा पलना,
यशोदा के अंगना रे,
खेल रहा ललना रे।।
आयी भादों महीने की,
रात अंधियारी,
जनम लियो कृष्णा रे,
रात है जनमअष्टमी वाली,
नाच मेरी बहना रे,
दर्शन को आए शिव कैलाशी,
मिट गई तृष्णा रे,
भीड़ लगी है नन्द के द्वारे,
देन बधईया रे,
सज गई सारी गोकुल नगरी,
बाजे चूड़ी कंगना रे,
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