
पावन चरण तुम्हारे ओ मन मोहन चितचोर
पावन चरण तुम्हारे,
ओ मन मोहन चितचोर,
हमको भी पावन करदे,
ओ प्यारे नंद किशोर।।
तर्ज – सावन का महीना।
सारे जगत का तू रखवाला,
मुरली मनोहर ओ नंदलाला,
तब तो तेरी पूजा,
होती है चारो ओर,
हमको भी पवन करदे,
राजा हो या दीन भिखारी,
मिलती है सबको किरपा तुम्हारी,
एक भाव से देखे,
तू सबको नवल किशोर,
दोष हमारे कान्हा चित न धरना,
मैं पतझड़ हूँ सावन करना,
‘राजेंद्र’ पे वर्षा दे,
तू किरपा माखन चोर,
गीतकार/गायक – राजेन्द्र प्रसाद सोनी।
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