
पिया तोड़ दो बंधन आज की अब रूह मिलना चाहती है भजन
पिया तोड़ दो बंधन आज,
की अब रूह मिलना चाहती है,
पिया दिल की यही आवाज,
की अब रूह चलना चाहती है,
तर्ज – आ लौट के आजा मेरे मीत।
आस उम्मीद सब तुमपे रखी,
मुझमे नहीं है कुछ भी मेरा,
कबसे रखा दिल चरणों में तेरे,
प्यार का जाम कहाँ है तेरा,
अब देर ना कर भरतार,
आशिक पिया के वो ही है जलते,
जो होंठो पे रखते है ताले,
आई लहर जो मस्ती भरी फिर,
दिल सम्भले ना लाख सम्हाले,
मेरे वश में नहीं जज्बात,
तड़पेंगे यहां कबतक बता दो,
दर्द दिया अब तुम्ही दवा दो,
अधर सुधा रस अब तो पीला दो,
यही दर्द बस यही दवा दो,
कर भी लो बाँह पसार,
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