
पूजन अर्चन ध्यान और वंदन,
ये हैं जीवन के आधार,
पितरों का तू सुमिरन कर ले,
हो जाएगा बेड़ा पार।।
तर्ज – कस्मे वादे प्यार वफ़ा।
ध्यान हृदय में इनका धरकर,
जो भी इन्हें मनायेगा,
पित्तरों की किरपा से ये घर,
अन्न धन से भर जायेगा,
पूरे होंगे काम अधूरे,
सर्वस तू इन पर बलिहार,
जब जब विपदा आए तुम पर,
पित्तरों का सुमिरन कर ले,
होंगे तेरे काम सफल सब,
कुलदेवता को मनन कर ले,
घर में इनके आशीर्वाद से,
आएगी खुशियाँ बेशुमार,
धन दौलत से घर भरते हैं,
दुःख दारिद्र मिटाते हैं,
सबकी पीड़ा हर लेते हैं,
कृपा सदा बरसाते हैं,
‘परशुराम’ ये जान रहे हैं,
सबके मन के भाव विचार,
गायक लेखक एवं प्रेषक –
परशुराम जी उपाध्याय।
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