
फिर अयोध्या जगमगाई,
राम मंदिर बन गया,
श्री राम मंदिर बन गया,
बांटो घर घर ये बधाई,
फिर अयोंध्या जगमगायी,
तर्ज – सांवरी सूरत पे मोहन।
बह रही सरयू सुधा सी,
छल छलाती निर्मला,
राम आ जाए नहाने,
किस घड़ी किस पल भला,
कल्पना साकार हो गई,
देवता ब्रह्मादि शिव,
सनकादि नाना भेष में,
तपसी साधु संत जन है,
स्वर्ग से इस देश में,
प्रेम की बांटो बधाई,
प्यारे सबके राम जी है,
वंदना माता सिया,
अष्ट सिद्धि नवनिधि वर,
अंजनि सुत को दिया,
‘लहरी’ छवि नयना लुभाई,
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