
राम नाम अलबेला,
भजो रे मन,
राम नाम कहूं मोल बिके ना,
मोल बिके न मोल बिके ना,
पैसा लगे ना धेला,
काहे माया मोह में लागो,
मोह में लगो हां मोह में लागो,
झूठइ सबई झमेला,
दुनियादारी साथ ना देहे ,
साथ ना देहे हां साथ ना देहे,
जाने पड़े है अकेला,
राम से प्रीत लगा ‘स्नेही’,
लगा ‘स्नेही’ लगा ‘स्नेही’,
छोड़के जग को मेला,
लेखक / प्रेषक – श्री नारायण सिंह लोधी “स्नेही”
इन्द्राना मझौली जबलपुर म.प्र.
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