
भज रघुवर श्याम युगल चरना,
एक के हाथे धनुष विराजे,
एक तो मुरली अधर धरना
एक को चित्रकूट नित राजे,
मधुवन एक विहार करना ,
एक तो जानकी संग विराजे,
एक तो राधा श्रृंगार करना ,
एक के कनक किरीट विराजे,
एक तो मोर मुकुट धरना,
राम श्याम बिच भेद कुछ नाही,
दोऊ भक्त हृदय हरना,
द्वारा :योगेश तिवारी
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