
भली करी गुरु दाता,
जीव राखीयो चोरासी मे जाता,
भूलूं नही लाखों बाता,
मारे गुरु वचनो रा नाता जी ओ जी।।
अरे कर्म गली सु आयो,
कर्मा सु काठो कडायो,
ए कर्म गली सु आयो,
कर्मा सु कठो कडायो,
गुरु बचालीयो दोनु हाथा,
पगो तनो पोगलीयो,
मारा सतगुरु हेलो साम्भलीयो,
नहीं तो रन बन मे रह जाता,
आंखीया सतो अंधारो,
गुरु भूंडो हाल हमारो,
सतसंग रा खेल बताया,
मारा सतगुरु सेन बताई,
साधु सिमरत राम सुख पाई,
गुरु शरनो मे राता माता,
गुरू ने ही लाखों बाता,
प्रेषक – मनीष सीरवी
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