
मुरली वालेया कृष्ण मुरार वे
मुरली वालिया कृष्ण मुरार वे
धुन – डाची वालिया मोड़ मुहार वे
ओ मुरली, वालिया, कृष्ण मुरार वे,
तेरी, मुरली दे नाल, साडा प्यार वे॥
तेरी, मुरली तोँ, सदके मैं जानी आँ,
राधा, रानी नूँ, आप मनाऊँनी आँ॥
आ के, सुन लै तूँ, साडी वी पुकार वे, हो…
हाय… तेरी, मुरली दे नाल, साडा प्यार वे।
तेरी, मुरली, यमुना ते वज्जदी,
सारी, सखियाँ दी, जिंद एह कड्डदी॥
आ के, सानूँ वी तूँ, करदे निहाल वे, हो…
तेरी, मुरली दे, योग निराले सी,
देखे, औंदे ने, जेहड़े करमा वाले सी॥
आ के, सानूँ वी सुना जा, सोहणी तान वे, हो…
तेरी, मुरली ने, ऐसा जादू पाया सी,
राधा, रुक्मण दा, दिल ओहते आया सी॥
आ के, दर्शन, दिखा जा इक वार वे, हो…
तेरे, मुखड़े तोँ, वारे वारे जानी आँ,
तैनूँ, मख्खणां दा, भोग लुआनी आँ॥
आ के, भोग लगा जा, इक वार वे, हो…
सारी, सखियाँ है, तैनूँ ही पुकारदियाँ,
तेरियाँ, राहवाँ ओह, तक तक निहारदियाँ॥
आ के, मुरली सुना जा, इक वार वे, हो…
अपलोडर — अनिलरामूर्ति भोपाल
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