
मेरी चाहत तेरे गीत गाने लगी
श्याम सुंदर तुम्हारी चितवन मधुर ब्रिज गलियों में मुझको नचा ने लगी
मेरी पायल की छम छम घुंघरू भजे मेरी चाहत तेरे गीत गाने लगी
यमुना तट पे मिली तुम से ये नजर
बस तभी से हुआ ये ऐसा असर,
बन के जोगन ब्रिज में फिरने लगी
मैं तुम्हारी दीवानी कहाने लगी
तेरी बांकी झलक अलबेली अलख तीखे तिर्शे नयन कजरारी पलक
तेरी घुंगराली लट पे होके मगन मेरी पतली कमर बल खाने लगी,
मन मन्दिर में तुमसे रोनक हुई रूप रंगत की बिखरी निखरी छटा,
नाम माधव मुरारी केशव रटू नाम से मीठी खुशबु आने लगी
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