
मेरी विनती सुनो सांवरे राम जी, वरना जाके कचहरी अपील करूँगा,
हार जाओगे खुद का मुकदमा प्रभु, श्री हनुमंत जी को अपना वकील करूँगा…….
दीनों का दुःख हरा, दीनबंधु हुए, कृपा दुखियों पे की, कृपासिंधु हुए,
मुझ दुखी की दशा, आप को ना दिखी, यही कहके, सभा में ज़लील करूँगा,
जितना मैंने तुम्हारा, लिया नाम है, उतना मेरा प्रभु, ना हुआ काम है,
सामना जिस दिन, होगा हमारा प्रभु, सामने आपके दलील रखूँगा,
मानता हूँ की ये मेरी खुदगर्जी है, चाहता हूँ कृपा ये मेरी मर्जी है,
पवन की अर्जी, पर अब विचार करो, मैं भी दुनिया में, भक्ति की कील रखूँगा,
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