
मेरे सिर पर सिंगा जबरा सिंगाजी भजन
मेरे सिर पर सिंगा जबरा,
आरे वो सदा करत रहु मुजरा,
मेरे सर पर सिंगा जबरा।।
अंतःकरण की तुम ही जाणो,
आरे गुरू तुम कारण मे उबरा,
जहाँज वान ने तुमको सुमरा,
आरे वो डुबी जहाँज लई उबरा,
झाबूआ देश भादरसिंग राजा,
आरे गुरू उसने तुमको सुमरा,
राज पाठ कुल छत्तर धरिया,
फैलावन दिया हो कुमरा,
देव श्री की मोटी महीमा,
आरे जहाँ मेला जुड़ीरा गेहरा,
कुवार महिना पुरण मासी,
आरे वहा मेला भरीयाँ गेहरा,
कहे जण दल्लू सुणो भाई साधू,
आरे वो गुरू चरण मे रहुगाँ
प्रेषक – घनश्याम बागवान सिद्दीकगंज।
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