
मोरी अरज सुनो गणराजा,
हे देवो के महाराजा।
दोहा – कहते तेरे दर पे,
बनता है नसीबा सबका,
तू ही सुनता है सबके दुखड़े,
तू ही है दाता सबका,
एक मेरी फरियाद भी,
सुनले भगवन,
तू ही चलाता है जग में,
खाता सबका।
मोरे भाग्य जगाने आजा,
देखे – मोरे अंगना गजानंद आए री।
तेरे दर पे देखे है मैंने,
मंगतो की झोली भरती है,
और काम सभी बन जाते है,
बिगड़ी तकदीर संवरती है,
मोरी लाज रखो गणराजा,
दर दर की ठोकर खाकर मैं,
अब द्वार तुम्हारे आई हूँ,
बस तुमसे आस लगाई है,
फरियाद यही मैं लाइ हूँ,
मोरी विपत हरो गणराजा,
अंतिम यही इच्छा मेरी,
दिन रात तेरे गुण गाऊं मैं,
हर शाम सुबह तेरा नाम जपूँ,
तेरी चौखट पे मर जाऊं मैं,
मेरी सुध लो गणराजा,
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