
सारे जग से प्यारा है,
अपना वतन,
वतन का ना होने,
देंगे पतन,
तर्ज – बहुत प्यार करते है।
आजाद भगत सिंह इसी,
धरती पे आए,
जिन्होंने वतन के लिए,
प्राण गंवाए,
इसी धरती पे आये,
राम और किशन,
‘धीरज’ का तुमसे,
यही सिर्फ कहना,
आपस में सभी,
हिल-मिल के रहना,
उजड़ने ना देना,
देश का चमन,
गायक / प्रेषक – धीरज कुमार गोस्वामी ‘रसिक जी’
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