
यहाँ बनता नसीबा सभी का
यहाँ बनता नसीबा सभी का,
जो भी आया यहाँ वो ही होके रहा बस यहीं का,
सारे जग से निराला ये दर है,
ऐसी चौखट है ये जहाँ भरता है दामन सभी का,
कैसी महिमा है कैसा है जादू,
जो भी इसका हुआ ये भी होके रहा बस उसी का,
यहाँ रोते हुए जो भी आते,
वो ही ले जाते हैं एक खज़ाना यहाँ से ख़ुशी का,
मैंने जीवन में जो कुछ भी पाया,
वो ही इसका दिया ये ही कहना है इसके रवि का,
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