
साधो भाई देखो न नजर पसार ।
या काया तन में रेल चल ।।
गाड़ी चलती है इंजन से, इसमे सात जगह पाणी के कलसे से ।
टिणों की एक एक कल से धुआं निकसे ह बे तू शुमार
या अग्नि आठुं पहर जलै ।। 1 ।।
पांच टिकट काटणिया पच्चीस टिकट बाँटणिया
तीन रेल रोकणिया इसमे चेतन सुरता है असवार
या गाड़ी जद पेण्ड चलअ ।। 2 ।।
नो सौ कील जोड़न की नवासी कील मोड़न की
पिच्यासी कील दोड़ण की जिसमे ऐसा नही रे हथियार
मांग्याँ कोनी मौल मिलै ।। 3 ।।
शिवलाल भजन बनाया ताजा इसमे रख दिया दस दरवाजा
दो पहिये छत्तिसुं बाजा एक दिन निकले डलेवर बाहर
या गाड़ी कोनी पेंड चल ।। 4 ।।
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