
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा,
झुक आये बदरा झुकी आये बदरा,
राधे झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
साजो सकल श्रृंगार नैना सारो कजरा।।
ऐसो मान ना कीजे हठ तजिए अली,
तू तो परम सयानी हो वृषभान की लली,
तेरो रसिक प्रीतम मग जोवत खड़ो,
राधे दोऊ कर जोड़े तेरे चरण पड्यो,
प्यारी झूलन पधारो झुकी आये बदरा,
स्वर – श्री मृदुल कृष्ण शास्त्री जी।
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