
कलयुग रा अवतार माता,
मैणादे रा लाल,
रूनीचे वाला आया जी,
मैं थारोडे दरबार,
रुणिचे वाला आया जी,
मास भादवे मेलो लागे,
नगर रूनीचा माय,
अजमलजी रा लाला आया जी,
दूर दूर सु आवे यात्री,
कोई बालक ने नर नार,
सुगना रो बीरो राखे जी,
कोई हर भगता री लाज,
इन कलयुग मे एक आसरो,
रूनीचे रा श्याम,
मै थारे द्वारे आयो जी,
थे राखो म्हारी लाज,
ऊंडू कश्मीर आप जन्मीया,
धोरां धरती माय,
विष्णु अवतारी आया जी,
कोई भगता रे इतकार,
लीले घोडे आप बिराजो,
भालो सोवे हाथ,
कोई धोरा धरती माय,
रामा कहूँ के रामदेव जी,
हीरा कहूँ के लाल,
रूनीचे वाला मिलगा जी,
ज्याने पल में किना निहाल,
हालो हरजी देवरे जी,
मिलसी रामापीर,
दुखीया ने सुखीया करता,
कोई साजा करे शरीर,
‘श्याम पालीवाल; गावे जी,
गायक – श्याम पालीवाल जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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