
लक्ष्मी का वास हो जिस घर में
तुमसे ही इज्जत मान मिले हर आशाओं का फुल खिले ।
झोली फैलाए जग सारा माता के सभी सवाली है ॥
खुशियाँ तुझसे तुम बिन गम है किरपा बिन ये आँखे नम है ।
है चाँद सा मुखड़ा माँ तेरा जिसपे सूरज की लाली है ॥
तेरे चरण जहाँ जाते माता खुशियों से दामन भर जाता ।
जिस जगह पे वास ना तेरा हो सब लगता खाली खाली है ॥
महिमा तेरी माँ न्यारी है शिवपुरी चरणों का पुजारी है ।
जाते है दिन संवर उनके जिनपे नज़रे माँ डाली है ॥
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