
गजानंद जी ने, ल्यावो रे मनाय,
वारी जाऊँ चरणन में ।
चरणन में, देवा चरणन में,
हो, चरणन में, देवा चरणन में ।।
सूंड सुंडाला दुंद दूण्डाला,
म्हारी सभा में रंग बरसाय ।
पार्वती रा पुत्र हो प्यारा,
शिव शंकर रा राज दुलारा ।
चरण चढ़ावां चुरमों
थारे लड्डुवन रो भोग लगाय ।
रणत भवन स्यूं आवो गजानंद,
रिद्धि सिद्धि ने संग में लाय ।
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