
वो खाटू का राजा है जिसे मैं प्यार करता हूँ
गाता हूँ जिसके लिए,
जिसके भजन करता हूँ,
वो खाटू का राजा है,
जिसे मैं प्यार करता हूँ,
तर्ज – जीता था जिसके लिए।
इनसे ही है मेरी ये जिंदगानी,
इनसे ही पहचान है,
इनको निहारु में इनको सवारु,
मेरा ये अरमान है,
मेरे श्याम तेरा,
दर्श यूं ही करता रहूं,
अपनों से ज्यादा करें मेरी चिंता,
ऐसा है दिलदार ये,
गिरने से पहले उठाने को आता,
यारों का है यार ये,
मेरे सर को तेरे,
दर पे झुकाता रहूं,
ग्यारस पे बाबा मुझे तुम बुलाना,
मैं आ जाऊंगा दौड़ के,
आ जाऊंगा दौड़ के,
दर को तुम्हारे मैं सच कह रहा हूँ,
ना जाऊंगा छोड़ के,
कन्हैया मैं तेरी,
यह सूरत सजाता रहूं,
गायक – श्री कन्हैया मित्तल जी।
प्रेषक – शेखर चौधरी।
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