
साईं सुनता दिल की बातें,
पूरी करता आरज़ू।
तर्ज – हर करम अपना करेंगे।
साईं राम है तू,
साईं श्याम है तू,
मेरा कर देता हर काम है तू,
इनकी रहमत का असर है,
आज मैं जो कुछ भी हूँ,
मांझी बनता साईं बाबा,
नाव जब मझधार हो,
कैसे डूबे उनकी नैया,
साईं जब आधार हो,
आधार हो,
पार है मुझको लगाया,
मैं सदा सुमिरन करूँ,
लाख चौरासी के फंदे,
साईं पल में काटता,
हो जहां नफ़रत दिलों में,
ये मोहब्बत बांटता,
हाँ बांटता,
ये लुटाता सबपे खुशियाँ,
मैं भी तो झोली भरूँ,
एक ही संदेश इनका,
सबका मालिक एक है,
वो ही पाते इनकी चौखट,
जिनकी नियत नेक है,
हाँ नेक है,
“सोनी” जब साईं भरोसे,
फ़िर जगत से क्यों डरूँ,
आकांक्षा मित्तल
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