
सिर पर रामदेव जी रो हाथ,
फिर कई बात को घाटो।
दोहा – रामा सामा आवजो,
कलजुग बहे रे करूर,
अरज करू अजमाल रा,
हेलो साम्भलजो हुजूर।
अरे बात को घाटो रे फिर,
कई बात को घाटो,
बात को घाटो रे फिर,
कई बात को घाटो रे,
सर पर रामदेव जी रो हाथ,
भादरवा में मेलो लागे,
भीड़ घणी भगतो री लागे,
ए सारे सबरा बिगडीया काज,
गाँव रूनीचो धाम है सोवे,
मूरत भगतो रे मन मोवे,
अरे गाँव रूनीचो धाम है सोवे,
के पाला आवे नर ने नार,
ढोल नगाडा शंख बजावे,
घिरत चूरमा रो भोग लगावे,
के गावे गावे मंगला चार,
निकलंक नेजा धार कहावे,
भगत चरण में शिश निवावे,
के आवे दिन दुखी संसार,
‘प्रकाश माली’ जगत सु गावे,
श्री चरणों में शिश निवावे,
के ध्यावे ध्यावे दिन ने रात,
स्वर – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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