
हो हो बालाजी किसा हो गया चाला हो बालाजी भजन
हो हो बालाजी किसा,
हो गया चाला हो,
दुख चिंता में काया जली,
रंग हो गया काला हो,
उठण दे ना बिल्कुल बाबा,
गेरै राखः खाट में,
चालण जोगी छोडः कोनया,
तोड़े जा स गात ने,
हद तं ज्यादा मैं सताई,
भुतां की बारात ने,
चौबीस घंटे रह साथ में,
ना करते टाला हो,
कई कई भुत बाबा मेरे,
भीतर बोले जां सं हो,
एक घड़ी भी चैन कोनया,
समसांणां में डोलें जां,
सोवण दे ना बालाजी मेरी,
गैल्यां आखर तोलें जां,
दिन और रात बोलें जां,
तेरी जान का गाला हो,
एक भुतणी कह मन्नै त,
मैं सुं काली माई हो,
तेरे दर प राजी हो क,
कलकते तं आई हो,
पुड़े गुलगले बणा खवादे,
गैल चुगानण ल्याई हो,
राजपाल ने राह दिखाई,
मेरा बण रखवाला हो,
मेरा बाबा रोग काट दे,
तेरी जोत जगाऊँगी,
देशी घी में तेरी बाबा,
सवामणी भी लाऊँगी,
कौशिक ने बुला क बाबा,
कीर्तन भी करवाऊँगी,
गाम समाल में बिल्लु शर्मा,
तेरी जपता माला हो,
गायक – नरेन्द्र कौशिक।
भजन प्रेषक – राकेश कुमार जी,
खरक जाटान(रोहतक)
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