
तेरी भक्ति से मिलता मेरे हृदय को आराम
मेरे राम मेरे राम मेरे राम
बस इतनी कृपा कर दो लेता रहूं तेरा नाम
तुम राजा हो मेरे मन के
तुमसे ही जग सारा
जो भी तुम्हरे शरण में आए
बन जाते हो सहारा
तेरे दर पे हनुमत सदा जपते है सीताराम
है दरबार तुम्हारा पावन
भेद भाव नहीं करते
दीन दुःखी निर्बल निर्धन हो
सबकी झोली भरते
हैं संयोग तेरे और तुझसे ही है उनकी शान
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