
मोहन से दिल क्यूँ लगाया है Mohan Se Dil Kyon Lagaya Hai
मोहन से दिल क्यूँ लगाया है
यह मैं जानू या वो जाने
छलिया से दिल क्यूँ लगाया है
हर बात निराली है उसकी
हर बात में है एक टेड़ापन
टेड़े पर दिल क्यूँ आया है
जितना दिल ने तुझे याद किया
उतना जग ने बदनाम किया
बदनामी का फल क्या पाया हैं
तेरे दिल ने दिल दीवाना किया
मुझे इस जग से बेगाना किया
मैंने क्या खोया क्या पाया हैं
मिलता भी है वो मिलता भी नहीं
नजरो से मेरी हटता भी नहीं
कर्मण्येवाधिकारस्ते
भज गोविन्दम्
श्री हरि स्तोत्रम्
कितना प्यारा है श्रृंगार
श्री गोवर्धन महाराज
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
फूलों में सज रहे हैं
राधे राधे
मैं आरती तेरी गाऊं
एक राधा एक मीरा
श्री जगन्नाथ आरती
मैं तो आई वृन्दावन धाम
श्रीकृष्ण शरणाष्टक
तुझसा दयालु नहीं प्यारे
दुनिया से मैं हारा
मेरा आपकी कृपा से
पकड़ लो हाथ बनवारी
तेरा संकट सारा हर लेंगे
जय जय राधा रमन हरि बोल
कीर्तन की है रात
हे विष्णु विधाता
सांवरे को दिल में बसाकर तो देखो
हरे कृष्णा हरे रामा
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो
मन बसिया
जिस के घर में खाटू वाले की
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
छाप तिलक सब छीनी रे
सजा दो घर को गुलशन सा
कन्हैया वे
नाम है तेरा तारण हारा
श्री गोपाल सहस्त्रनाम स्तोत्रम्
हे श्याम ध्वजा बंदधारी
मन में बसा कर तेरी मूर्ति
आरती भानु दुलारी की
कौन कहते हे भगवान आते नहीं
इतना तो करना स्वामी
गिर गया जमुना जल में
तृष्णा ना जाये मन से
उस बाँसुरी वाले की
तू विश्वास कर
ओ कान्हा अब तो मुरली की
जिसने बोला राधे राधे उसको श्याम मिला
गोविन्द भजले
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