
(*नेकी की राह
नेकी की राहों पे तू चल
रब्बा रहेगा तेरे संग
वो तो है तेरे दिल में हाँ
तू क्यों बाहर उसे ढूँढता
कभी है वो साहिल पे
कभी है वो मौजों पे
कभी है परिंदा वो उड़ता हुआ
वो तो ख़ुदा है
जीवन हैरां है
उसको न मज़हब में कैद करना
वो वफादार है
हाँ खुद ही प्यार है
साये में उसके सुकूँ कितना
दुनिया का नूर है
ना तुमसे दूर है
पाकीज़गी में वो है बसता
नूर-ए-ख़ुदा का है आसरा
वो ही तो है अपना
ये जहां उसका है
रब से मोहब्बत कर
उसकी इबादत कर
उसने ही दी है हमें ज़िन्दगी
उसके करम से, हर वचन से
राहों पे तेरी गिरेगी रोशनी
सबको तू माफ़ कर
खुद ना इन्साफ कर
उसपे तो हक बस ख़ुदा का ही है
तू औरों से इस कदर मिल
जैसे तू चाहे वो तुझसे मिले
कर ये शुरुआत ईमान है
तो पर्वत भी तेरे हुकुम पे चलें
श्री सिद्धिविनायक मंत्र और आरती
मेरी विनती सुनो गणराज
गणेश चालीसा
शेंदुर लाल चढ़ाय
घर में पधारो गजानन जी
गणपति अथर्वशीर्ष
गणेश आरती
तेरी जय हो गणेश
वक्रतुण्ड महाकाय
सुख हरता दुःख हरता
गणेशा
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