
राम लला है राम लला हम
तन है और तुम प्राण समझ लो
द्वार तुम्हारा ना छोड़ेंगे
हमको भी हनुमान समझ लो
नगरी वो सरजू किनारे
जहां रहते हैं रघुवर हमारे
कह दो ये जाके कोई चंद्रमा से
आरती प्रभु की उतारे
कोई सावन की घटा ऐसे बरसेगी कहां
जैसे भक्तों के नयन बेहार बरसे
गली गली बिना तेरे मारे मारे से फिरे
जैसे अनाथ कोई ममता को तरसे
14 बरस का वनवास देखा तब जाके चमकी माथे की रेखा
नैना खुशी से है भीगे भीगे दशरथ के ललना पधारे
नगरी वो सरजू किनारे जहां रहते हैं रघुवर हमारे
तूने बिन मांगे हमें दे दिया राम रतन
जो किसी मोल पे वो बिकता नहीं है
सांवली तेरी छवि जब से देखी है हरी
हमें अब और कोई दिखता नहीं है
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