
कन्हैया, दीन दुखियों के, सहायक, तुम कहाते हो,
दुखी हूँ, दीन हूँ मैं भी, मुझे फिर क्यों भुलाते हो,
बढ़ाई, सुन के रहमत की, तुम्हारे, ददर पे आया हूँ
रहम की, भीख दो दाता, मैं गर्दिश का, सताया हूँ
हमेशा, आप ही बिगड़ी में आखिर, काम आते हो,
इनायत, की नजर करके, बालाएं टाल दो दाता
खुशी मेरी भी, झौली में, जरा सी डाल, दो दाता
जहाँ की, नेमतें तुम तो, गरीबों, पे लुटाते हो,
मैं जग से, हार कर आया, तू हारे का सहारा है
तुम्हारे, बिन नहीं जग में, कहीं मेरा, गुजारा है
लगाकर, अपने चरणों में, तरस बेकस पे खाते हो,
बड़ी बेदर्द है, दुनियां, भरोसा क्या करूँ इस पर
जहाँ दिल, दे के मैं आया, वहीं से आ रहे पत्थर
गजेसिंह, प्यार का रिश्ता तो बस तुम, ही निभाते हो-ओ
भजन गायक- विकास रघुवंशी (दिल्ली)
लेखक- श्री गजे सिंह जी (भिवानी)
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