
कोई भक्त ना ऐसा होगा जैसा पवनपुत्र हनुमान
कोई भक्त ना ऐसा होगा,
जैसा पवनपुत्र हनुमान,
जो चीर के छाती दिखलाकर,
बोलेगा जय श्रीराम,
जय श्रीराम जय श्रीराम,
अंजनी का लाडला,
और सिया का दुलारा है,
पवनपुत्र रामजी के,
आँखों का तारा है,
जो ध्यान धरे इनका,
उसका हो जाये पूरण काम,
महिमा न वरणी जाये,
अंजनी के लाला की,
मन में बसा लो छवि,
बजरंग बाला की,
अपने हिरदय को बनाया जिसने,
सियाराम का धाम,
बल अपार देह,
हेम शैल के समान है,
ज्ञानियों में ज्ञानी सारे,
गुणों के निधान हैं,
ये परमभक्त रघुवर के,
जपते हरदम सीताराम,
दरशन करा दो हनुमत,
हमें सीताराम से,
भक्ति जगा दो मन में,
प्रभु के ही नाम से,
प्रभु का सुमिरन करते-करते,
तर जाये ‘परशुराम’
लेखक एवं प्रेषक – परशुराम उपाध्याय।
स्वर – सौरभ उपाध्याय।
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